Story and Poetry Spot.........Musafir
Thursday, March 5, 2026
"पारदर्शी पिचकारी"
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"पारदर्शी पिचकारी" ये कुछ रंग बच गए, कहीं बेगाने जच गए कुछ खास रह गए , यादें पास रख गए आज रंग समेटते याद आ गई, बचपन...
Tuesday, April 1, 2025
"भामा"
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पूछा एक दोस्त ने, एक बार मुझसे, की दिखती कैसी है? जो करती है इतनी मोहब्बत तुझसे क्या खास ऐसा उसमें, जो किसी और में नहीं ? कोई और ना बना दुनि...
Saturday, March 29, 2025
कमीज की मसक
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शाम मे आजकल अजब सी कसक है इस्त्री हुई कमीज पर पुरानी सी मसक है क्या सोचती होगी देखकर उस पार झरोंको से ये आस लगाए रहता हूं दिया था, तु...
Wednesday, March 26, 2025
इक तस्वीर हमारी
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"उस मुलाकात में, जब पुछा मैंने हाल ? कहती, याद आती है आज भी तुम्हारी" फिर कुछ ना कहा सुन कर "गर कभी याद आ जाए तो जला देना,...
शायर की मात
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कितना कुछ सुनना है, ये अब पता चला जब खोया सा मैं, कल तुझसे मिला कहने को, बातूनी तुम, हर किसी के लिए कहूं कुछ तो शांत, सुर्ख होंठो को सिये ...
Thursday, March 20, 2025
बिसरी बात
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गए, कल फिर वही बात हुई बिसरी, सहसा फिर साथ हुई अंजान सा मैं, चुप था मगर धीरे से ही सही, पर कुछ बात हुई पूछा उसने, कैसे हो अब तो चैन से ...
Friday, October 11, 2024
शिकायत
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कहता हैं, बदल गई हो तुम, पहले सा, अब कुछ नहीं मैं हाज़िर, कह गई जवाब में तुम सा हसीं, कोई और नहीं चुप था शिकायती, क्षणिक फिर बोला... ...
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