Showing posts with label Holi. Show all posts
Showing posts with label Holi. Show all posts

Monday, March 9, 2020

रंगीन मिजाज - नकाबपोश


ये रंग भी नकाब है, मलमल नही गुलाल है,
हरपल बदल के चल रही, ये जिंदगी कमाल है,

जो तुम मलो तो, कौन हो ?
जो मैं मलुं तो, मौन हो !

सुनो जरा, वो रंग हरा, छिडक न देना, तुम वहां
जहां वो अजनबी हंसी, वो झांकती सी खिडकियां

याद अब भी है मुझे, वो रंग जो पसंद तुझे
ना कर वो जिद, यकीन कर, न होगी अब वो दूरियां
लगा के रंग, हो मलंग, करे हंसी अठखेलियां


कश्यप द्विवेदी

Monday, March 26, 2012

होली ...... ज़िन्दगी का नया रंग


आओ फिर खेले रंग ....... एक नयी उम्मीद संग ..

हाथ अबीर गुलाल है .. जिगर में जशन-ऐ-मलाल है...


देख मुसाफिर देख आसमा कितना रंगीन है...

चेहरों से खुश दुनिया कितनी गमगीन है....


यहाँ हर चेहरे पर एक नया रंग है 

तू चार कोस चल अकेले, फिर नया संग है ...


वक़्त की इस राह पर न जाने कितने हम सफ़र 

न भूल अपना रंग तू, न डगमगाना इस डगर....


कोई मैला कोई सुनहला रंग भरके जाएगी 

ज़िन्दगी बड़ी दीवानी होली खेल के जाएगी ....   







   

                       

                                           कश्यप द्विवेदी  




.